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बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना देश छोड़कर क्यों भाग गईं

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बांग्लादेश
साल 1971 में बांग्लादेश को आजादी मिल जाती है और जैसे ही आजादी मिलती है तो वहां पर एक स्थिति पैदा हो जाती है भुखमरी की लाखों लोग ऐसे थे जिन्हें एक वक्त का खाना भी नहीं मिल रहा था ऐसी स्थिति में खाने कमाने की बड़ी दिक्क्त पढ़ रही थी एक गांव लगता है चिटगांव यहाँ की रहने वाली एक महिला ने एक सूदखोर से 500 टका लिए थे बांग्लादेश की भाषा में वहां पर टका बोलते हैं और इंडिया में रुपए बोलते हैं

जैसे ही उसने पैसे लिए वह पैसे वापस देने की स्थिति में थी नहीं तो उस सूदखोर ने उस महिला पर एक तरह से कब्जा जमा लिया वह महिला कभी मेज बेचती थी बनाकर तो कभी कुर्सियां बेचा करती थी अब जैसे-जैसे सूदखोर चाहता था वैसे महिला को करना पड़ता था गांव के ही एक व्यक्ति की उस महिला पर नजर पड़ जाती है

महिला से उस व्यक्ति ने पूछा कि तुम बहुत ज्यादा परेशान रहती हो क्या बात है तब उसने सूदखोर की कहानी उस व्यक्ति को बताई तो उस व्यक्ति ने कहा तुम परेशान बिल्कुल मत हो और 500 टका मुझसे लो और उस सूदखोर के पैसे उतार देना और जैसे ही इस महिला को यह बात पता चली तो महिला ने कहा कि तुम्हें मैं क्या दूंगी उसने कहा कि जब तुम्हारे पास पैसे हो जाए तो मुझे वापस कर देना मुझे कुछ भी और नहीं चाहिए

यानी कि जिस तरह से तुम सूदखोर के साथ जुड़ी हो इस तरह से तो यह गुलामी है देश आजाद हो चुका है और तुम अभी भी गुलामी कर रही हो उस महिला ने ठीक वैसे ही किया 500 टका उधार लेकर उस सूदखोर के दे दिए और जब महिला के पास पैसे हो जाते हैं तब उस व्यक्ति की उधारी भी दे देती है… पूरी कहानी जानने के लिए नीचे वीडियो पर क्लिक करें